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Monday, November 6, 2017

ब्लॉग: २०१९ बद्धल आपली भूमिका काय?

आज श्री. प्रफुल्ल पटेल यांनी कर्जत येथे चालत असलेल्या पक्षाच्या बैठकीत २०१९ मध्ये पवार साहेब देशाचे प्रधानमंत्री बनू शकतात असे सांगितले. १९९९ साली स्थापित झालेल्या वाजपेयी सरकार मध्ये पवार साहेबांना आमंत्रण देण्यात आलं होत असं पण त्यांनी सांगितलं. पवार साहेब मात्र जुळले नाही. सध्या विरोधी असलेल्या ममता बॅनर्जी देखील त्यावेळी सामील झाल्या. पण पवार साहेबांनी मात्र नाकारलं. 


       पुरोगामी तत्वांवर बनलेल्या राष्ट्रवादी काँग्रेस पक्षाच्या अध्यक्ष शरद पवार साहेबांनी आजपर्यंत आपले तत्व कधी वेठीवर बसवले नाहीत. पक्ष आणि विचारधारा यांना कधीही स्वतःच्या पदासाठी वापरलेलं ठाऊक नाही. काँग्रेस पक्ष दोनवेळा सोडला तरी तो फक्त पक्षातील बिघडत चालेल्या संस्कृतीमुळे. एकंदरीत सांगायचं झालं तर पक्ष आणि तत्वांना सर्वोच स्थान मनात देऊन पुढारलेली व्यक्ती असा पवार साहेबांचा लौकिक आहे. असंख्य आरोप करून फक्त विडंबन करण्यासाठी प्रयत्नशील असलेल्या विरोधकांना पवार साहेबांवर एकही आरोप सिद्ध करता आला नाही. हे सगळं ठाऊक असतांना या नावाचा विचार काँग्रेस ने कधीच करायला हवा होता. 
      अनेकवेळा प्रसारमाध्यमातून जेटली आणि मोदी यांची बारामती शहराबद्धलची भावना समोर येतेच. महाराष्ट्रातील ज्या ज्या भागातून राष्ट्रवादीला सत्ता मिळाली तिथं घडलेली विकास कामे शर्थीवर पहावीत. राज्यात विकासकामासंदर्भात राष्ट्रवादी काँग्रेस पक्षाचा हात कोणालाही धरता येणार नाही. मग अशावेळी राज्यातील जनतेने हे सर्वोच्च पदावर महाराष्ट्राची अस्मिता जपणाऱ्या पवार साहेबांना राजकीय वाटचालीसाठी पुरेपूर मदत करायलाच हवी. पुणे, बारामती, पिंपरी-चिंचवड, सातारा, नवी मुंबई, इत्यादी कितीही नाव घ्या. योगदान कोणाचं आहे ते पहा. 

     या पंतप्रधानांच्या मुद्द्यावर चर्चा तेव्हा करू जेव्हा पवार साहेब काही बोलतील. तत्पूर्वी काही बोलण्यास विशेष अर्थ नाही. पण देशाला आपल्या राज्यातून नेता मिळायला नको का? मित्रांनो तुम्ही कुठल्याही पक्षाला समर्थन करणारे असाल तर इतक्यासाठी प्रेमाने हाथ पुढे करून महाराष्ट्र एकटवण्याची ताकद राष्ट्रवादी काँग्रेस पक्षाच्या कार्यकर्त्यांमध्ये शंभर टक्के आहे!

Wednesday, July 26, 2017

१३वी शताब्दी का यह 'महादेव मंदिर' शायद ही बच पाएगा...

("Dharasur" is originated by the name of Lord Shiva .There is a temple of lord Shiva situated on the bank of river Godavari,  that is called Dhareshwar .  Temple was built in 11th century during Chalukyan regime. This temple is supposed to be one of the few amongst having Shikhar intact so far.)

महाराष्ट्र के परभणी जिले का गंगाखेड़ तहसील यहां के पुराने मंदिरोंसे अपनी पहचान बनाये बैठा तो है मगर अब यहांकी धरोहरोंका भविष्य अँधेरे में दिखाई पड़ता है।  वास्तुकला के अनेक तरह के नमूनों से बना ये शहर अपने धुंदलेसे आनेवाले कल की तरफ पीठ मोड बैठा है।  यहाँ सरकार भी गुनहगार है और हम भी।

                       सावन के महीने से टाइमलाइन पर आदियोगी महादेव जी की तस्वीरें और शुभकामनाओंसे भरा देख मन प्रसन्न सा रहता है।  हम हररोज या मानो हर हफ्ते महादेवजी की पूजा करने नजदीक के मंदिर में समय से पहुँच भी रहे हैं।  बेल के पत्तोंसे सुरभित देवालयोंके गर्भगृह मन में शान्ति भर देने में हमेशा सफल रहें है।  'ॐ' का उच्चार भी तो है।  लेकिन कुछ था की हमने इस एक मंदिर के बारे में सुना था और  आज उसे ढूंढने और वहां जाने का मन किया।  गंगाखेड़ शहर  के पास ही गोदावरी के किनारे पे बसे 'धारासुर' नामक इस छोटे गांव में नदी के तट पर ही बसे हैं शंकरजी।  साथ में नंदी भी है और कुछ है जो इसकी महत्वता का परिचय है।  वो है इसकी 'हेमाडपन्ति रचना।' १३ वि शताब्दी का यह मंदिर कसबे के सबसे पुराने वास्तुओंमेंसे एक है।



                         ऊँचा कलश, मोहक सा शिखर पाससे गुजरती प्रवाह में चलती गोदावरी और अचम्भित करता हुआ ये अद्भुत ऐतिहासिक शिल्प।  मन्दिर मानो किसी बहुत बड़े महादेव भक्त ने पुरे दिल से बनाया हो।  'गुप्तेश्वर मन्दिर' की दीवारें काले पत्थरोंपर शिल्पकला के विभिन्न नमुनोंसे भरी है।  गणेशजी, देवियाँ और देवताओंके साथ ही कामुक मूर्तियाँ भी खजूराओंके के मंदिर दिलाती है।  शंकर जी मूर्ति जस की तस है और बड़ी प्रसन्न भी।  गाँववालोंको बीएस इतना पता है की यह मन्दिर हेमाडपंत वास्तुकला से बना है और काफी पुराना है।

     मंदिर का काफी हिस्सा अभी भी भले ही शानदार लगता हो, लेकिन दिल टूट सा जाता है जब इसका दूसरा हिस्सा आप देख लेते हैं।  दीवारें टूट कर गिर रहीं है और शिखर भी आधा गिर चूका है।  ७०० बरस का जप मानो थम जाएगा जल्द ही।  केदारनाथ के मंदिर को भगवान् ने बचा ही लिया था।  पर अब इसे बचने शायद ही कोई आएगा।  ऐसे ४-५ वास्तुकला से बने पुराने ऐतिहासिक धरोहर के अलावा नजदीक कुछ भी नहीं।  सरकारोनें मानो इसको भुला ही दिया हो।  गाँव के लोग अपनी क्षमता के अनुसार इसे बचा तो रखें है पर इसका सहीसे संधारण करना पुरे इलाके के बस की बात ही नहीं।

     बाकी हम है और आप हैं।  और ये समाज है हमारा जो बस चिंता में मग्न है!!

Thursday, May 25, 2017

कोई अपना टीव्ही डिबेट पे आया है..

टेलीविज़न के प्राइम टाइम की हर सनसनी डिबेट आजकल २ छोर के लोग हमारे सामने रखती है।  एक दूसरे की विचारधारा का शिकार करते ये लोग कभी ये भी भूल जाते हैं की अंततः ये सब किया किस चीज के लिए जा रहा है।  क्यूंकि ज्यादातर डिबेट्स का मुख्य विषय देश और देश के खिलाफ बाहरी और अंदरूनी ताक़तोंका रचा षड़यंत्र ही बचा है आजकल। यहाँ रचनात्मक कुछ भी नहीं होता।  निकर्ष पे आना असंभव।  एंकर की माने तो वो खुद भी एक विचारधारा लेके चल रहा होता है।  आखरी में नोएडा, दिल्ली या गुरुग्राम के किसी स्टूडियो से उठकर ये लोग किसी उच्च मानक रेस्ट्राँ में बैठकर वाइन से अधभरे प्यालोंकी 'चियर्स' वाली खनखनाहट के पीछे वो चौथा स्तंभ भूल चुके है जो देश-निर्माण में सबसे अहम् माना गया था।
                                     रिपब्लिक टीवी नया चैनल है। अर्नब गोस्वामी साहब को कौन नहीं जानता? इनके डिबेट्स में अगर आप सबकी नजर में गलत है तो बोल ही नहीं सकते।  ऐसा लगता है मानो ये हमारी आवाज  बन के उभरे है।  क्यूंकि अक्सर जो बातें हम देश विरदोही ताक़तोंको (जो शायद बीएस हमारी नजर में देश विरोधी है) सुनना चाहते है, ये अच्छे अंग्रेजी शब्दोंमें सुना ही देते है।  यहाँ बेशर्मी की हद पार करते मैंने कई बड़े लोगोंको देखा है।  देश पर जब भी बात होती है तो कम्युनिस्ट नेताओंके बयान शर्मनाक से लगते है।  JNU जैसे विश्वविद्यालयोंके प्रोफ़ेसर भी हमें शर्मसार करनेमें कोई कसर नहीं छोड़ते।  हम जो टैक्स के रूप में भारतीय सरकार तक आमदनी का कुछ हिस्सा पहुंचाते है, वो मानो शायद किसी अच्छे काम आ ही न रहा हो।

        ऐसे में हम सब को जरुरत थी किसीको लाने की जो हमारी बात रख सके।  जो ये कह सके की हमारी पड़ोस वाली गली का वो गरीब घर का लड़का जो आर्मी में २-३ साल पहले भर्ती हुआ है वो 'अत्याचारी' नहीं।  वो कश्मीर की लड़कियोंके साथ जबरदस्ती करने वहां नहीं गया है।  कश्मिरियोंके लिए उसके दिल में कोई नफरत भर के नहीं भेज रहा।  कोई ये भी बता दे की उस लड़के को अगर पैसा और व्यवस्था की सेवायें कम दाम में चाहिए होती तो वो इतने दम के साथ राजनीती का पेशा अपना ही सकता था।  राशन की कालाबाजारी भी उसने ऐसे कलेजे के साथ आराम से की होती।  अपने माँ बाप के पास रहकर घर की रोटी खा कर वो तुम्हे गरिया भी सकता था।  देशप्रेम उसमें तब ही से था जब उसने स्काउट की वर्दी के लिए बचपन में घर मे अनबन की थी। स्टूडियो के पैनल में बैठे हुर्रियत के आशिक शायद ये नहीं जानते वहाँ पहुचानेमें उस लड़के के माँ बाप ने क्या क्या श्रम उठाये होंगे।  ये बातें इन्हे समझने वाला भी तो कोई चाहिए ही था।    
    कुछ महीनो पहले मैंने टीव्ही डिबेट में पहली बार मेजर गौरव आर्या को सुना।  सीधी और सटीक भाषा।  आर्मी वाला चौड़ापन।  करीब करीब अर्नब की ही उम्र का ये आदमी सच्चाई के साथ इन महान पैनलिस्टोंकी धज्जियां उड़ाना जानता था।  आर्मी की बात रखने काम पहली बात सही आदमी ने उठाया है।  मेजर गौरव आर्या हमारा गौरव हैं।  मै बता हूँ कैसे .....
             हाल ही में 'कुलभूषण जाधव' पे एक डिबेट हुई।  जिसमें पाकिस्तानी पैनेलिस्ट ने कहा की,'कुलभूषण ने अपना गुनाह काबुल कर लिया है और आप उसका स्टेटमेंट देख सकते है। ' इसका जवाब देते हुए मेजर साहब ने कहा की,"आप मुझे एक घंटा दे दीजिये, मै आप से स्टेटमेंट निकलवा दूंगा की आप लश्कर ए तय्यबा के लिए काम करते हैं।' मेजर साहब की ये बात तालियाँ पिटवाने के लिए नहीं, हमारी अपनी मानसिकता के काम आएगी।  उनकी जुनैद मट्टू,  शबनम लोन, इत्यादि हुर्रियत प्रेमी लोगोंसी कही हुई बातें यूट्यूब पे आसानी से मिल जाएंगी।  और ये बातें आप को सही लगने की वजह बता दूँ, वजह ये है की हम और आप वहीँ सोचते है जो हमारी प्रिय भारतीय आर्मी सोचती है।

              मेजर गौरव आर्या १७वी बटालियन (कुमाउ रेजिमेंट ) के हिस्सा रहे है।  ७ साल आर्मी में रहने के बाद उनको रिटायरमेंट लेनी पड़ी।  वजह थी फेफड़ो का कमजोर होना।  विचारोंकी कट्टरता जो उनमें है वो हमारे देश के लिए जरुरी भी है। आर्मी वाला गुरुर किसको अच्छा नहीं लगता? मेजर वो है और वो कहते है जो हम बनना चाहते हैं और कहना चाहते है।  या फिर शायद हमें बनना चाहिए और कहना चाहिए।  उनकी कही ये बात को जरा गौर से पढियेगा।
 लड़ाई सिर्फ आर्मी की नहीं होती, पुरे देश की होती है।  हम सबको इसे साथ में लड़ना होगा!
ये महज एक आम बात नहीं जो एक आर्मी अफसर कह दे।  ये वो बात है जो हमें समझ ने की जरुरत है।  तब जब आप भारतीय बनावट की कोई चीज को ठुकराकर चायनीज चीज ले और उन लोगोंको पैसा पहुंचाएं जो पाकिस्तान को पैसा दे कर अपने ही देश पे हमला करवाएं।  बदलाव इतने भी आसानीसे नहीं आते।   का और हमारा भी मानना है हम धीरे धीरे इसको अपनेमें समाले।  कुछ बचे न बचे, ये देश तो बचना चाहिए!

अंततः एक और बात कह दू, कभी मेजर साहब ने बोली हुई बातें सुनन या फिर उनका ब्लॉग पढ़ना।  वो खत भी पढ़ना जो उन्होंने बुरहान वाणी को लिखा था।  उसे कहा था की वो देश के लिए तब ही मर गया था जब उसने बन्दुक उठाली थी।
हुर्रियत के नेताओंके बेटे-बेटी क्या कर रहे हैं एक बार आप खुद इंटरनेट पढ़ले और सोचें की सिर्फ गरीब का बच्चा की क्यों जिहाद करे? 

मेजर गौरव आर्या का ब्लॉग 

Monday, May 15, 2017

आम की पंखुडियोंवाला गजब का केक..

पुणे शहर खानेवाले शौकीनोसे भरा पड़ा है। यहाँ अलग अलग Food Portals है।  और एक अलग सी दुनिया बस चुकी है।  खाने-पिने की चीजोंसे भरी दुनिया।  देखे यहाँ क्या ख़ास पक रहा है आज कल.. 
            चोकोईस्ट्री (Chocoistry).. बड़ा उम्दा नाम लगता है किसी बेकरी का।  साल २०१६ में पुणे के हर अखबार में इसका नाम रहा होगा।  'होम बेकर' शेफाली सुरतवाला के सपनो की दुनिया 'Chocoistry'!
   शेफाली सुरतवाला के बारे में अगर आप पुणे के किसीभी खाद्य-चहेता से बात करेंगे तो वो सबसे पहले एक ही बात बोलेगा,'गुलाब आम केक!' Mango Rose Cake  पुणे में बड़ा लोकप्रिय है। इंटरनेट के कई सोशल मिडिया साइट्स पर इसके बारे में चर्चाएं होती रहती है।  मार्च माह की शुरुवात में इसका नाम सुनाई पड़ने लगता है और खलबल सी मच जाती है।  लोग इसके बारे में दिन रात बात करते लगे रहते है।  इसे यूँ भी कह दें तो बड़ी बात नहीं होगी की लोग इससे जुड़े ट्रेंड को जीने लगे है। 

   'वैनिला स्पॉन्ज' का बेस बनाकर उसे व्हिप क्रीम से भर दिया जाता है हर केक की तरह।  फिर उसपे बड़े कलात्मक तरीके से आमके फांकोंको गुलाब की पंखुडियोंकी तरह सजाया जाता है।  इस पुरे खेल में बिना बिगाड़ इतनी रचनात्मक कलाकृती को लेके लोग यूँही मुग्ध नहीं हो जाते। इस केक को आधे, और / किलो के परिमाण में बेचा जाता है। इनकी कीमत Rs. 850 से शुरू होती है।  शेफाली की तरह कई Home Bakers इसे बनाने में अब जुड़ गए हैं। शहर के लगभग हर इलाके में आप इसको घर पहुंचा पा सकते हैं।  शेफाली और अन्य बेकर्स की इस कलाकृति का कदरदान पुणे शहर तो है ही, बजाय इसके इन्हे एक नाम दिया गया है, ‘Mango Queen!’ अपने ही अलग दुनिया की इस गुजराती एंटरप्रेन्योर को 'शगल' की और से हार्दिक शुभकामनाएं!

आप भी इस शानदार केक का लुत्फ़ उठा सकते है।  https://www.facebook.com/shefschocoistry/ इस फेसबुक पेज पर आज शेफाली से संपर्क कर सकते हैं। 

इस लेख के बारे में आप हमे बताना भी मत भूलियेगा!

Friday, May 12, 2017

Average Indian के मन की बात..

An Open Letter to the PM of India..
भारत के 'लोकप्रियप्रधानमंत्री,
आदरणीय नरेंद्र मोदीजी,
                         चुनाओंका दौर चलता रहता है हिंदुस्तान मेंआपभी प्रयास कर ही रहे हैं की सारे चुनाव एकसाथ होंऐसेमें उस विषय में हाथ डालनाउचित नहींपर बात अब इस 'एवरेज इंडियनके दिलों दिमाग पर असर कर रही है तो वो बातें उगलेगा ही।
  असंतोष तो है साहबजब २०१२ में आप गोवा में मराठी में चुटकी लेते हुए भाषण की शुरुवात किये थे तो मेरे जैसा वो हर मराठी ‘एवरेज इंडियन’जानके बैठा था की येबस ये व्यक्ती ही देश का अगला प्रधानमंत्री होगा। उसके बात आपने हर राज्य में हम जैसे लोगोंका समर्थन पाया होगा। बात ऐसीही तो हैकी हम ही वो हैं जिसे दिल्ली-कलकत्ता जैसे शहरोंमें बड़े विश्वविद्यालयोंमें बैठे उदारवादी चरित्र वाले लोग 'Cult' मानते है। उन्हें लगता है कीहम ही भक्त बन सकते है किसीके। हम ही शायद वो लोग है जो क्लिकबैट वाली खबरोंपर लाइककॉमेंट और शेअर का बटन दबाकर गर्व महसूस करतेहो। और हम ही वो है जो दिन रात 'Visual दुनियामें अपने देश के लिए जंग लड़तें हो। असलीयत में एवरेज इंडियन कुछ ऐसा ही होता है। पर एक बातवो नहीं जानते की एवरेज इंडियन उतनाही गरियाता भी है!!
                                      हाल ही में सुकमा में हिंदुस्तानी जवानो पर हमला हुआ। CRPF के २४ शहीद अब अलविदा कह गये। उसके घरवालोंका औरदोस्तोंका दर्द हम और आप नहीं समझ सकते। हम समझ बस एक ही चीज सकते हैं, 'बदला'! क्यूंकि हम हैं हीएवरेज इंडियन!! वो टीवी डिबेट में बड़ेविश्वविद्यालयोंके प्राध्यापक और प्राध्यापिका जिन 'Human Rights' की बात करते हैं उनका हमें ज्ञान होता ही नहीं है। उन जवानोका नहीं होता तो नक्सलियोंका कैसा 'Human Right'? पण्डितोंका नहीं होता तो बाकी कश्मिरियोंका कैसा 'Human Right'? और अगर किसान का नहीं तो उन बड़ेकारोबारियोंका कैसा 'Human Right'? एवरेज इंडियन की इस सोंच वाला पहलु आपने शायद देखा ही नहीं होगा। हमें बस चुनाव में ही क्यों लगे कीमोदीजी जनता की मनोदशा भाँप जाते हैंआपसे एक दरख्वास्त इतनी भी है कभी वेश बदलकर किसी मिडल क्लास फैमिली के घरके खिड़की पे तबकान लगाइएगा जब वो थका  हुआ काम से लौटकर टीव्ही के सामने बैठा होगाटीव्ही पे 'सुकमाया 'उरीजैसी कोई खबर हो और राजनाथ जी का वो हीसुनहरा सा बयान आएकड़ी निंदा वालाबस उसी वक़्त आप जनता की असली मनोदशा समझ चुके होंगे!
       ५६ इंच का सीना और सर्जिकल स्ट्राइक वाली दहाड़ कोई 'बाहुबलीजैसी 'Once in a life time'  चित्रकथा बनके  रहजाए।  आप देश के सब से अच्छे प्रधानमंत्री हैंसोचा आप ही सुनलेंगे हम जैसे एवरेज इंडियन की बातअब खून खौलने दीजियेगा।  क्यूंकि हम ये भीजानते है की आप भी दिल ही दिल में हम जैसे एवरेज इंडियन ही है!